डिजिटल नवाचारों ने दिए शिक्षा को नए आयाम

पिछले कुछ सालों में शिक्षा के क्षेत्र में पठन-पाठन के तरीकों में एक बड़ा बदलाव आया है। इस बदलाव में प्रौद्योगिकी ने एक अहम भूमिका निभाई है। डिजिटल लर्निंग और स्मार्ट डिवाइसेज जैसे स्मार्ट फोन, कम्प्यूटर और टैबलेट के बढ़ते उपयोग ने विद्यार्थियों की अध्ययन शैली को बेहतर बनाया है। कोरोना महामारी की गंभीरता को देखते हुए देशभर में केंद्र सरकार के द्वारा लॉकडाउन लगा दिया गया। इससे जनजीवन तो प्रभावित हुआ ही साथ ही बच्चों की पढ़ाई को लेकर एक बड़ी समस्या सामने आई कि बिना स्कूल खोले पढ़ाई कैसे जारी रखी जाए? लॉकडाउन के दौरान बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो इसके लिए शिक्षा विभाग ने ई-शिक्षा के तहत बच्चों की शिक्षा जारी रखी। ई-शिक्षा राज्य सरकार का एक नया नवाचार है जिसमें कोरोनाकाल में बच्चों की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए विभिन्न कार्यक्रमों के तहत पढ़ाई जारी रखने का फैसला किया गया। यह कहना गलत नहीं होगा कि कोरोना वैश्विक महामारी ने हर क्षेत्र में प्रौद्योगिकी को लगभग केंद्र स्तर पर ले जाने का मार्ग प्रशस्त किया है। अब देखिये ना किसने सोचा होगा कि बच्चों की पढ़ाई यूं मोबाईल, कम्प्यूटर और टैबलेट के दायरे में ही सिमट जाएगी। ई-कक्षा :- ई-कक्षा कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य राज्य के समस्त विद्यालयों के लिए ई-लाइब्रेरी तैयार करना है ताकि शिक्षक की अनुपस्थिति में भी विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित ना हो। इसकी जरूरत देश में कोरोना की विषम परिस्थितियों को देखकर पड़ी है। कोरोनाकाल में बच्चों की पढ़ाई बाधित ना हो इसके लिए सरकार ने ई-कक्षा कार्यक्रम की शुरुआत की जिसमें एन्डॉयड मोबाइल फोन, यूट्यूब चैनल और ऐप के माध्यम से बच्चे अध्ययन कर रहे हैं। शिक्षादर्शन:- कोरोनाकाल में स्कूल शटडाउन के दौरान दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट की सीमित उपलब्धता के कारण विभाग ने शिक्षा दर्शन कार्यक्रम की शुरुआत की। जिसके अंतर्गत टेलीविजन के माध्यम से पाठ्य सामग्री का प्रसारण किया गया। शिक्षावाणी:- शिक्षादर्शन की तर्ज पर ही विभाग ने शिक्षावाणी कार्यक्रम की शुरुआत की। जिसमें रेडियो के माध्यम से पाठ्यसामग्री प्रसारित की गई। स्माईल:- कोरोनाकाल के दौरान बच्चों की पढ़ाई बाधित ना हो यह सबसे बड़ी चुनौती रही। जिसे ध्यान में रखते हुए प्रदेशभर के समस्त सरकारी स्कूलों में पढ़ाई ना रुके इसके लिए शिक्षा विभाग ने स्माइल कार्यक्रम चलाया। इस कार्यक्रम में व्हॉट्सएप के माध्यम से वीडियो कंटेंट उपलब्ध कराया जा रहा है। यूट्यूब:- यूट्यूब के माध्यम से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थी अपने शिक्षकों से लाइव जुड़ सकेंगे। लाइव के दौरान पढ़ाई के साथ-साथ बच्चे पाठ्यक्रम से जुड़े सवाल पूछकर तुरंत प्रभाव से समाधान प्राप्त कर रहे हैं।